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Showing posts from August, 2024

पर्वत धर उंगली पर, गिरिधर कहलाए

कृष्ण-नाम-स्मरण जब पर्वत धारा उंगली पर, कहलाये तुम गिरिधर  धर बाँसुरी अधरों पर, तब कहलाये तुम वंशीधर,  बंधी पेट पर रस्सी कसकर, बने तभी दामोदर  रंगमंच के अद्भुत नट, नटवर, नटखट, नटनागर नंद-पुत्र होने के कारण नंदलाल, नंदनन्दन  पुत्र यशोदा के होने से तुम्हीं यशोदानन्दन वसुदेव के वासुदेव, माता से देवकीनन्दन  सबके मन को मोहित करते, इसीलिए मनमोहन चुरा-चुराकर खाया माखन, इससे माखनचोर जरासन्ध से भागे रण में, कहलाये रणछोड़ गोप-गोपियों के स्वामी कहलाते गोपीवल्लभ राधाजी के परमसखा राधावर, राधावल्लभ रास रचाकर रसिकबिहारी, तुम ही हो रसराज ब्रज के स्वामी तुम ब्रजवल्लभ, ब्रजभूषण, ब्रजराज कुंज-वनों में विचरण कर बनवारी, कुंजबिहारी पीले कपड़ों के कारण ही तुम पीताम्बरधारी बाँकी मोहक छवि होने से तुम ही बाँकेबिहारी रथ का पहिया लिया हाथ में, तुम रथांगपाणि अर्जुन के तुम बने सारथी, पार्थसारथी नाम काले बादल जैसा रंग है, कहलाते घनश्याम तीन जगह से मुड़ी भंगिमा, इसीलिए त्रिभंगी मोरपिच्छ का मुकुट पहनकर बने मयूरमुकुटी रंग साँवला होने से कहते तुमको साँवरिया मंगलकारी छल करते हो, इसीलिए तुम छलिया ग...

जीवन में कम से कम एक बार गोवर्धन का दर्शन और स्पर्श क्यों करना चाहिए?

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  गिरिराज जी की जय श्री गिरिराज जी दर्शन श्री जी मंजरी दास द्वारा . जीवन में कम से कम एक बार गोवर्धन का स्पर्श क्यों करना चाहिए? . गिरिराज गोवर्धनजी की परिक्रमा की परंपरा है। भगवान कृष्ण ने गोवर्धन को धारण करके गोकुल की रक्षा की थी। . गोवर्धन का स्पर्श पाना भी सौभाग्य की बात है। आज आपको गोवर्धन की महिमा की एक ऐसी कथा सुना रहे हैं, जो आपने पहले नहीं सुनी होगी, कि क्यों लोग गिरिराजजी की शिला को अपने घर में रखते हैं! . प्रत्येक श्री कृष्ण भक्त को अपने जीवनकाल में एक बार गोवर्धन अवश्य जाना चाहिए और उसका स्पर्श करना चाहिए। . गर्ग संहिता की जो कथा मैं सुनाने जा रहा हूँ, वह स्वयं नारदजी ने सुनाई थी! . राजा बहुलाश्व ने नारद को सेवा से प्रसन्न किया और नारदजी से ज्ञान प्राप्त करना प्रारंभ किया। . बहुलाश्व ने नारदजी से पूछा- हे देवर्षि, गोवर्धनजी में ऐसी क्या विशेषता है, जो मैं गोवर्धनजी की महात्म्य कथा सुनने का इच्छुक हूँ उसी को लेने वह मथुरा आया था! । वह दिन में स्वस्थ हुआ और संध्या होने से पहले अपनी राह चल पड़ा । । गिरिराज जी के पास पहुंचते-पहुंचते गोवर्धन में अंधेरा हो...

गिरिराज जी के शिला को घर लाने से पहले इसको जरूर पढ़ें

गिरिराज जी के शिला को घर लाने से पहले इसको जरूर पढ़ें  मथुरा-वृंदावन की यात्रा के दौरान भगवान श्री कृष्ण में खो जाते हैं। यहां पर श्री कृष्ण की जन्मस्थली से लेकर रास लीला शामिल है। अनेकों मंदिर मौजूद है जहां पर बांके बिहारी के दर्शन करके हर एक भक्त का मन भाव-विभोर हो जाता है। कहा जाता है कि मथुरा-वृंदावन में श्री कृष्ण के विभिन्न रूपों का दर्शन करने के साथ-साथ गिरिराज यानी गोवर्धन पर्वत के दर्शन जरूर करना चाहिए। तभी आपकी ये यात्रा पूर्ण मानी जाती है। बता दें कि मथुरा से 21 किलोमीटर और वृंदावन से 23 किमी की दूरी में गोवर्धन पर्वत मौजूद है। जहां पर हर साल लाखों भक्त पहुंचते हैं। इसके साथ ही दीपावली के 3 दिन बाद यानी गोवर्धन पूजा के दिन यहां पर विशेष पूजा जाती है। गर्गसंहिता के अनुसार, गिरिराज को पर्वतों का राजा और श्री कृष्ण का प्यारा कहा जाता है। लेकिन कई भक्तों का मानना है कि गिरिराज को अपने घर ले जाने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा करना चाहिए? आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से... वृंदावन से जरूर लेकर आएं ये 2 चीज, हर दुख- दर्द होगा दूर, हर काम म...